Fundamental Rights in India 2021

भारत के नागरिकों के मौलिक अधिकार | Fundamental Rights in India 2021

भारत के नागरिकों के मौलिक अधिकार | Fundamental Rights in India

Fundamental Rights in India 2021
Fundamental Rights in India 2021 | Source: Wikipedia

आज हम बात करेंगे मौलिक अधिकारों के बारे में मौलिक अधिकार क्या होते हैं और इनका हमारे देश में क्या महत्व है|

मैं आपको मौलिक अधिकार इस तरीके से पढ़ाऊंगा यदि आप किसी भी स्कूल में हो या अगर आप यूपी एससी की तैयारी कर रहे हो या आप एसएससी की या पीसीएस किसी भी प्रकार की तैयारी कर रहे हो आपके लिए संपूर्ण होगी|

क्योंकि आज मैं आपको मौलिक अधिकार डि टेल में पढ़ाने जा रहा हूं|

सबसे पहले आपको पता होना चाहिए कि हमारा मौलिक अधिकार अमेरिका से लिया गया है|

भारत के मौलिक अधिकारों को मैग्नाकार्टा भी कहा जाता है इसको संविधान में भाग 3 में अनुच्छेद 14 से अनुच्छेद  32 के अंतर्गत रखा गया है|

हमारे मूल संविधान में 7 मौलिक अधिकार थे जबकि वर्तमान में भारत में 6 मौलिक अधिकार है|

जो इस प्रकार है|


  1. (समता यह समानता का अधिकार ) जिसको अनुच्छेद 14 से 18 के बीच रखा गया है|
  2. (स्वतंत्रता का अधिकार ) जिसको अनुच्छेद 19 से अनुच्छेद 22 के बीच रखा गया है|
  3. (शोषण के विरुद्ध अधिकार ) जिसको अनुच्छेद 23 और अनुच्छेद 24 में रखा गया है|
  4. (धार्मिक स्वतंत्रता का अधिकार ) जिसको अनुच्छेद 25 से अनुच्छेद 28 के बीच रखा गया है|
  5. (संस्कृति और शिक्षा संबंधी अधिकार ) जिसको अनुच्छेद 29 और अनुच्छेद 30 में रखा गया है|
  6. (संवैधानिक उपचारों का अधिकार) कहते हैं इसको अनुच्छेद 32 में लिखा गया है|

अब इन मौलिक अधिकारों को विस्तार से पढ़ते हैं|

सबसे पहले समानता का अधिकार|

इसको अनुच्छेद 14 से अनुच्छेद 18 के अंदर रखा गया है|

अनुच्छेद 14 विधि के समक्ष समता| इसका अर्थ यह है कि राज्य सभी व्यक्तियों के लिए एक समान कानून बनाएगा तथा एक समान उन सभी लोगों पर लागू करेगा| कानून बनाते वक्त किसी भी प्रकार का कोई भेदभाव नहीं किया जाएगा|

अनुच्छेद 15 धर्म नस्ल जाति लिंग या जन्म स्थान के आधार पर भेदभाव का निषेध|

राज्य के द्वारा धर्म, मूल, वंश, जाति, लिंग एवं जन्म स्थान आदि के आधार पर नागरिकों के प्रति जीवन के किसी भी क्षेत्र में भेदभाव नहीं किया जाएगा| अनुच्छेद 16 लोक नियोजन के विषय में अवसर की समानता| राज्य के अधीन किसी पद पर नियोजन या नियुक्ति से संबंधित विषयों में सभी नागरिकों के लिए अवसर की समानता होगी|

अपवाद अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति एवं पिछड़ा वर्ग|

अनुच्छेद 17 अस्पृश्यता का अंत| अस्पृश्यता के उन्मूलन के लिए इसे दंडनीय अपराध घोषित किया गया है| 

अनुच्छेद 18 उपाधियों का अंत||| सेना या विधा संबंधी सम्मान के सिवाए अन्य कोई भी उपाधि राज्य द्वारा प्रदान नहीं की जाएगी|भारत का कोई नागरिक किसी अन्य देश से बिना राष्ट्रपति की आज्ञा के कोई उपाधि स्वीकार नहीं कर सकता है|

 स्वतंत्रता का अधिकार||

नोट: अनुच्छेद 19 मूल संविधान में 7 तरह के स्वतंत्रता का उल्लेख था अब सिर्फ छह हैं अनुच्छेद 19 ऐ संपत्ति का अधिकार 44 वा संविधान संशोधन 1978 के द्वारा हटा दिया गया है|

6 तरह की स्वतंत्रता का अधिकार|

  1. 19 ए बोलने की स्वतंत्रता|
  2. 19 b  शांतिपूर्वक बिना हथियारों के एकत्रित होने और सभा करने की स्वतंत्रता|
  3. 19 c  संघ बनाने की स्वतंत्रता|
  4. 19 d देश के किसी भी क्षेत्र में आवागमन के स्वतंत्रता
  5. 19e देश के किसी भी क्षेत्र में निवास करने और बसने के स्वतंत्रता
  6. 19f जी कोई भी व्यापार एवं जीविका चलाने की स्वतंत्रता|

नोट: प्रेस की स्वतंत्रता का वर्णन अनुच्छेद 19  ए मैं ही है|

अनुच्छेद 20 अपराधों के लिए दोष सिद्धि के संबंध में संरक्षण|

इसके तहत तीन प्रकार की स्वतंत्रता का वर्णन है

नंबर 1 किसी भी व्यक्ति को एक अपराध के लिए सिर्फ एक बार सजा मिलेगी|

नंबर 2 अपराध करने के समय जो कानून है उसी के तहत सजा मिलेगी ना के पहले और बाद में बनने वाले कानून के तहत|

नंबर 3 किसी भी व्यक्ति को स्वयं के विरुद्ध न्यायालय में गवाही देने के लिए बाध्य नहीं किया जाएगा| अनुच्छेद 21 प्राण एवं दैहिक स्वतंत्रता का संरक्षण|

किसी भी व्यक्ति को विधि द्वारा स्थापित प्रक्रिया के अतिरिक्त उसके जीवन और व्यक्तिक स्वतंत्रता के अधिकार से वंचित नहीं किया जा सकता है|

नोट अनुच्छेद 21 के तहत प्रत्येक सरकार का दायित्व बनता है कि वह अपने नागरिकों को स्वच्छ एवं स्वस्थ पर्यावरण उपलब्ध कराएं| अनुच्छेद 21 का राज्य 6 से 14 वर्ष के आयु के समस्त बच्चों को ऐसे ढंग से जैसे कि राज्य विधि द्वारा आधारित करें निशुल्क तथा अनिवार्य शिक्षा उपलब्ध कराएगा| 86 वा संविधान संशोधन 2002 के तहत||

अनुच्छेद 22 कुछ दशकों में गिरफ्तारी और निरोध में संरक्षण|

अगर किसी भी व्यक्ति को मनमाने ढंग से हिरासत में ले लिया गया है तो उसे तीन प्रकार की स्वतंत्रता प्रदान की गई है

नंबर 1 हिरासत में लेने का कारण बताना होगा 

नंबर दो 24 घंटे के अंदर आने जाने के समय को छोड़कर उसको दंडाधिकारी के समक्ष पेश किया जाएगा 

नंबर 3 उसे अपने पसंद के वकील से सलाह लेने का अधिकार होगा

निवारक निरोध|भारतीय संविधान के अनुच्छेद 22 के खंड तीन चार पांच तथा छह में तक संबंधी प्रावधानों का उल्लेख है निवारक निरोध कानून के अंतर्गत किसी व्यक्ति को अपराध करने के पूर्व भी गिरफ्तार किया जाता है निवारक निरोध का उद्देश्य व्यक्ति को अपराध के लिए दंड देना नहीं वरन् उसे अपराध करने से रोकना है वस्तुत यह निवारक निरोध राज्य के सुरक्षा लोक व्यवस्था बढ़ाने रखने या भारत के सुरक्षा संबंधी कारणों से हो सकता है|

शोषण के विरुद्ध अधिकार

शोषण के विरुद्ध अधिकार इसका उल्लेख संविधान के अनुच्छेद 23 और 24 में किया गया है|

अनुच्छेद 23 मानव के  दुर्ग व्यापार और बलात श्रम का प्रतिशत|

इसके द्वारा किसी व्यक्ति की खरीद, बिक्री, बेगारी तथा किसी प्रकार का अन्य जबरदस्ती लिया हुआ श्रम निषेध ठहराया गया है इसका और लगन विधि के अनुसार दंडनीय अपराध है|

अपवाद: लेकिन अगर राष्ट्र सेवा की जरूरतों को पूरा करने के लिए श्रम करना पड़ता है तो उसके लिए बाध्य होना पड़ेगा|

अनुच्छेद 24 बालकों के नियोजन का प्रतिशत| 14 वर्ष से कम आयु वाले किसी बच्चे को कारखानों, खानों या अन्य किसी जोखिम बड़े काम पर नियुक्त नहीं किया जा सकता है

धार्मिक स्वतंत्रता का अधिकार|

धार्मिक स्वतंत्रता का अधिकार का उल्लेख अनुच्छेद 25 से अनुच्छेद 28 तक किया गया है|

अनुच्छेद 25 अंतः करण की और धर्म के अभाव रुप में बांधने आचरण और प्रचार की स्वतंत्रता| कोई भी व्यक्ति किसी भी धर्म को मान सकता है और उसका प्रचार प्रसार कर सकता है|

अनुच्छेद 26 धार्मिक कार्यों के प्रबंध के स्वतंत्रता| व्यक्ति को अपने धर्म के लिए संस्थाओं की स्थापना व पोषण करने विधि सम्मत संपत्ति के  अर्जुन स्वामित्व प्रशासन का अधिकार है|

अनुच्छेद 27 राज्य किसी भी व्यक्ति को ऐसे कर देने के लिए बाध्य नहीं कर सकता है जिसकी आए किसी विशेष धर्म अथवा धार्मिक संप्रदाय की उन्नति या पोषण में विवाह करने के लिए विशेष रूप से निश्चित दी गई है| 

अनुच्छेद 28 राज्य में घोषित किसी शिक्षा संस्था में कोई धार्मिक शिक्षा नहीं दी जाएगी ऐसे शिक्षण संस्थान अपने विद्यालयों क्यों किसी धार्मिक अनुष्ठान में भाग लेने या किसी धर्म उपदेश को सुनने हैं तो बाध्य नहीं कर सकते हैं|

संस्कृति एवं शिक्षा संबंधी अधिकार|

अनुच्छेद 29 अल्पसंख्यक वर्गों के हितों का संरक्षण

कोई भी अल्पसंख्यक वर्ग अपनी भाषा लिपि और संस्कृति को सुरक्षित रख सकता है और केवल भाषा जाति धर्म और संस्कृति के आधार पर उसे किसी भी सरकारी शैक्षिक संस्था में प्रवचन नहीं रोका जाएगा|

वर्तमान में 6 समुदाय को अल्पसंख्यक का दर्जा दिया गया है यह समुदाय हैं मुस्लिम, पारसी, ईसाई, सिख, बौद्ध एवं जैन|

अनुच्छेद 30 शिक्षा संस्थाओं की स्थापना और प्रशासन करने का अल्पसंख्यक वर्गों का अधिकार|

कोई भी अल्पसंख्यक वर्ग अपने पसंद का शैक्षिक संस्था चला सकता है और सरकार से अनुदान देने में किसी भी तरह का भेदभाव नहीं करेगी|

संवैधानिक उपचारों का अधिकार

संवैधानिक उपचारों के अधिकार को डॉक्टर भीमराव अंबेडकर ने संविधान की आत्मा कहा है|

संवैधानिक उपचारों का अधिकार में अनुच्छेद 32 ही है|

अनुच्छेद 32 के अंतर्गत मौलिक अधिकार को परिवर्तित कराने के लिए समुचित कार्यवाही हो द्वारा उच्चतम न्यायालय में आवेदन करने का अधिकार प्रदान किया गया है यानी कि अगर आप के मौलिक अधिकारों का हनन होता है तो सीधे आप सुप्रीम कोर्ट यानी कि सर्वोच्च न्यायालय में जाकर आवाज़ उठा सकते हो|

Complete Indian Constitution

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